जमीन रजिस्ट्री प्रक्रिया हुई आसान, अब घर बैठे डिजिटल तरीके से होगी रजिस्ट्री | Land Registry

By Priya

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भारत सरकार की डिजिटल इंडिया मुहिम के तहत संपत्ति रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया में क्रांतिकारी बदलाव आया है। अब नागरिकों को जमीन या मकान की रजिस्ट्री के लिए सब-रजिस्ट्रार कार्यालय के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। ई-रजिस्ट्रेशन सुविधा के माध्यम से घर बैठे ही संपत्ति का पंजीकरण संभव हो गया है। यह व्यवस्था न केवल समय की बचत करती है बल्कि पारदर्शिता और भ्रष्टाचार मुक्त प्रणाली को भी बढ़ावा देती है।

पारंपरिक रजिस्ट्री प्रक्रिया की चुनौतियां

पहले की रजिस्ट्री प्रक्रिया में कई समस्याएं थीं। लोगों को कई बार सब-रजिस्ट्रार ऑफिस जाना पड़ता था, लंबी कतारों में घंटों इंतजार करना होता था, और कागजी कार्रवाई में भारी समय लगता था। दलालों और बिचौलियों का दखल आम बात थी, जिससे अनावश्यक खर्च बढ़ जाता था। इसके अलावा दस्तावेजों में गड़बड़ी, धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े की घटनाएं भी सामने आती रहती थीं।

ऑनलाइन रजिस्ट्री प्रणाली: कैसे काम करती है?

डिजिटल लैंड रजिस्ट्री प्रणाली पूरी तरह से ऑनलाइन आधारित है। इसमें खरीदार और विक्रेता दोनों को राज्य सरकार के संबंधित पोर्टल पर पंजीकरण करना होता है। सबसे पहले दोनों पक्षों को अपनी पहचान डिजिटल रूप से सत्यापित करनी होती है, जिसके लिए आधार कार्ड का उपयोग किया जाता है। इसके बाद संपत्ति से संबंधित सभी दस्तावेज डिजिटल फॉर्मेट में अपलोड किए जाते हैं।

पोर्टल पर स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन शुल्क की स्वचालित गणना होती है। भुगतान ऑनलाइन किया जा सकता है। दस्तावेजों का वेरिफिकेशन डिजिटल रूप से होता है और सब-रजिस्ट्रार द्वारा ऑनलाइन जांच की जाती है। सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद डिजिटल हस्ताक्षर के माध्यम से दस्तावेज पर साइन किए जाते हैं और रजिस्ट्रेशन प्रमाणपत्र जारी हो जाता है।

ई-रजिस्ट्री के प्रमुख लाभ

डिजिटल रजिस्ट्री प्रणाली के अनेक फायदे हैं। सबसे बड़ा लाभ समय की बचत है – जो काम पहले कई दिनों में होता था, वह अब कुछ घंटों में हो जाता है। घर बैठे सारी प्रक्रिया पूरी हो जाती है, इसलिए यात्रा खर्च और समय दोनों बचते हैं।

पारदर्शिता इस प्रणाली की सबसे बड़ी ताकत है। हर चरण ऑनलाइन ट्रैक किया जा सकता है और स्टेटस रियल टाइम में देखा जा सकता है। रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार की गुंजाइश लगभग खत्म हो गई है क्योंकि सारी प्रक्रिया डिजिटल रिकॉर्ड में दर्ज रहती है। दलालों और बिचौलियों की आवश्यकता नहीं रहती, जिससे अतिरिक्त खर्च से बचा जा सकता है।

सुरक्षा के लिहाज से भी यह प्रणाली बेहतर है। डिजिटल रिकॉर्ड में छेड़छाड़ नहीं की जा सकती। बायोमेट्रिक और आधार आधारित सत्यापन से फर्जीवाड़े की संभावना न्यूनतम हो जाती है। सभी दस्तावेज क्लाउड पर सुरक्षित रूप से संग्रहीत रहते हैं।

आवश्यक दस्तावेज और पात्रता

ऑनलाइन रजिस्ट्री के लिए कुछ जरूरी दस्तावेजों की आवश्यकता होती है। खरीदार और विक्रेता दोनों के आधार कार्ड, पैन कार्ड और फोटो पहचान पत्र अनिवार्य हैं। संपत्ति से संबंधित दस्तावेज जैसे मूल विलेख, टाइटल डीड, नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट और टैक्स रसीदें भी चाहिए।

यदि संपत्ति कृषि भूमि है तो 7/12 या 8-ए उत्तरा, खसरा-खतौनी जैसे दस्तावेज आवश्यक हैं। शहरी संपत्ति के लिए म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन से संबंधित कागजात जरूरी होते हैं। यदि संपत्ति किसी सोसायटी में है तो NOC और शेयर सर्टिफिकेट की भी आवश्यकता पड़ती है।

स्टेप-बाय-स्टेप ऑनलाइन रजिस्ट्री प्रक्रिया

पहला कदम है अपने राज्य के रजिस्ट्रेशन पोर्टल पर जाना और अकाउंट बनाना। इसके लिए मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी से रजिस्ट्रेशन करना होता है। फिर खरीदार और विक्रेता दोनों को अपनी केवाईसी करानी होती है, जिसमें आधार वेरिफिकेशन होता है।

दूसरे चरण में संपत्ति विवरण भरना होता है – पता, सर्वे नंबर, क्षेत्रफल आदि। फिर सभी आवश्यक दस्तावेज स्कैन करके अपलोड करने होते हैं। सिस्टम स्वचालित रूप से स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस की गणना करता है।

तीसरे चरण में ऑनलाइन भुगतान किया जाता है – नेट बैंकिंग, डेबिट कार्ड या यूपीआई के माध्यम से। भुगतान की रसीद सिस्टम में सेव हो जाती है। इसके बाद अपॉइंटमेंट बुक करना होता है जिसमें समय स्लॉट चुना जाता है।

चौथे चरण में दोनों पक्ष या तो वर्चुअली या सब-रजिस्ट्रार ऑफिस में मौजूद रहकर डिजिटल साइनिंग करते हैं। कुछ राज्यों में पूर्णतः ऑनलाइन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से भी यह प्रक्रिया पूरी की जा सकती है।

अंतिम चरण में सब-रजिस्ट्रार द्वारा सभी दस्तावेजों की जांच की जाती है और डिजिटल रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट जारी किया जाता है। यह सर्टिफिकेट डिजिटल लॉकर में सेव हो जाता है और आप इसे कभी भी डाउनलोड कर सकते हैं।

विभिन्न राज्यों में ई-रजिस्ट्रेशन पोर्टल

देश के विभिन्न राज्यों ने अपने-अपने ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन पोर्टल लॉन्च किए हैं। महाराष्ट्र में ‘महारेरा’ और ‘इग्रस’ पोर्टल हैं। उत्तर प्रदेश में ‘स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन विभाग’ की वेबसाइट उपलब्ध है। कर्नाटक ने ‘कावेरी’ पोर्टल शुरू किया है जो काफी एडवांस्ड है।

तमिलनाडु में ‘टीएन-आईजीआरएस’ पोर्टल काम करता है। दिल्ली में ‘दिल्ली सरकार संपत्ति पंजीकरण’ पोर्टल सक्रिय है। गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश सहित अधिकांश राज्यों ने अपनी ऑनलाइन प्रणाली विकसित की है।

चुनौतियां और समाधान

हालांकि डिजिटल रजिस्ट्री प्रणाली में कुछ चुनौतियां भी हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्या अभी भी बनी हुई है। बुजुर्ग नागरिकों और कम शिक्षित लोगों को डिजिटल प्रक्रिया समझने में कठिनाई होती है। तकनीकी खराबी कभी-कभी समस्या उत्पन्न कर सकती है।

इन चुनौतियों के समाधान के लिए सरकार ने सीएससी सेंटर्स (कॉमन सर्विस सेंटर) स्थापित किए हैं जहां लोगों को मदद मिल सकती है। सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों में हेल्पडेस्क की व्यवस्था है। हेल्पलाइन नंबर और वीडियो ट्यूटोरियल भी उपलब्ध हैं। धीरे-धीरे जागरूकता बढ़ने के साथ यह प्रक्रिया और आसान होती जा रही है।

भविष्य की संभावनाएं

ऑनलाइन लैंड रजिस्ट्रेशन भारत में रियल एस्टेट सेक्टर को पूरी तरह बदल देगा। ब्लॉकचेन तकनीक के इस्तेमाल से और भी सुरक्षित प्रणाली विकसित की जा रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से दस्तावेजों की तत्काल जांच संभव हो सकेगी।

राष्ट्रीय स्तर पर एकीकृत रजिस्ट्री प्रणाली विकसित करने की योजना है। इससे किसी भी राज्य की संपत्ति का रजिस्ट्रेशन देश में कहीं से भी किया जा सकेगा। डिजिटल इंडिया के विजन को साकार करने में यह महत्वपूर्ण कदम है।

निष्कर्ष

डिजिटल लैंड रजिस्ट्री प्रणाली भारत में संपत्ति लेनदेन को आधुनिक, पारदर्शी और सुविधाजनक बना रही है। यह न केवल आम नागरिकों के लिए फायदेमंद है बल्कि सरकारी राजस्व में वृद्धि और भ्रष्टाचार में कमी भी लाती है। हालांकि अभी कुछ चुनौतियां हैं, लेकिन निरंतर सुधार और जागरूकता के साथ यह प्रणाली पूरे देश में सफल होगी। डिजिटल इंडिया की इस पहल से देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और नागरिकों का जीवन सरल बनेगा।

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