अब मिलेगा ₹7,500 महीना! 36-मंथ नियम में राहत से लाखों लोगों को फायदा | EPFO Pension Scheme

By Priya

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EPFO Pension Scheme

EPFO Pension Scheme – भारत में संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी Employees’ Provident Fund Organisation (EPFO) एक महत्वपूर्ण संस्था है। EPFO के तहत संचालित Employees’ Pension Scheme (EPS-1995) के माध्यम से लाखों सेवानिवृत्त कर्मचारियों को हर महीने पेंशन मिलती है। हाल के समय में 36-मंथ नियम में राहत और न्यूनतम ₹7,500 मासिक पेंशन की मांग ने फिर से चर्चा तेज कर दी है। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो इससे देशभर के लाखों पेंशनभोगियों को बड़ा लाभ मिल सकता है।

क्या है EPFO और EPS-1995 पेंशन योजना?

Employees’ Provident Fund Organisation भारत सरकार के श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अंतर्गत काम करने वाली संस्था है। यह कर्मचारियों के भविष्य निधि, पेंशन और बीमा से जुड़ी योजनाओं का संचालन करती है। Employees’ Pension Scheme 1995 के तहत कर्मचारी के रिटायर होने के बाद उसे मासिक पेंशन दी जाती है। इस योजना में नियोक्ता के योगदान का एक हिस्सा पेंशन फंड में जाता है, जिससे भविष्य में कर्मचारी को पेंशन मिलती है। EPS का लाभ लेने के लिए कम से कम 10 वर्ष की सेवा आवश्यक होती है।

क्या है 36-मंथ नियम और क्यों है चर्चा में?

पेंशन की गणना पेंशन योग्य वेतन और पेंशन योग्य सेवा के आधार पर की जाती है। पेंशन योग्य वेतन आमतौर पर अंतिम निर्धारित महीनों के औसत वेतन से तय होता है। पहले यह अवधि अलग-अलग रही, बाद में इसे 60 महीनों के औसत पर आधारित किया गया। अब 36-मंथ नियम की मांग इसलिए उठ रही है क्योंकि कर्मचारियों का मानना है कि अंतिम 36 महीनों का औसत वेतन लेने से पेंशन की राशि अधिक हो सकती है। आमतौर पर करियर के अंतिम वर्षों में वेतन अधिक होता है, इसलिए कम अवधि का औसत लेने से पेंशन योग्य वेतन बढ़ सकता है।

यदि 36 महीनों का औसत लागू किया जाता है तो कई कर्मचारियों की मासिक पेंशन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी संभव है। इसी कारण यह मुद्दा पेंशनर्स संगठनों के बीच प्रमुख चर्चा का विषय बना हुआ है।

₹7,500 न्यूनतम पेंशन की मांग क्यों उठी?

वर्तमान में EPS के तहत न्यूनतम पेंशन ₹1,000 प्रति माह है। बढ़ती महंगाई, चिकित्सा खर्च और दैनिक जरूरतों को देखते हुए यह राशि काफी कम मानी जाती है। कई पेंशनभोगी इस रकम में गुजारा करने में कठिनाई महसूस करते हैं। इसलिए विभिन्न संगठनों ने न्यूनतम पेंशन को बढ़ाकर ₹7,500 प्रति माह करने की मांग की है। साथ ही महंगाई भत्ता जोड़ने की भी मांग की जा रही है, ताकि पेंशनधारकों को समय के साथ राहत मिल सके।

यदि सरकार इस मांग को स्वीकार करती है तो लाखों बुजुर्गों की आर्थिक स्थिति में सुधार आ सकता है। यह कदम सामाजिक सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

पेंशन की गणना कैसे होती है?

EPS के तहत पेंशन की गणना एक निश्चित फॉर्मूले के आधार पर की जाती है। मासिक पेंशन = (पेंशन योग्य वेतन × पेंशन योग्य सेवा) ÷ 70। पेंशन योग्य वेतन अंतिम तय अवधि के औसत वेतन से निर्धारित होता है और पेंशन योग्य सेवा कुल कार्यकाल को दर्शाती है। उदाहरण के तौर पर यदि किसी कर्मचारी की पेंशन योग्य सेवा 30 वर्ष है और उसका औसत वेतन अधिक है, तो पेंशन की राशि भी उसी अनुपात में बढ़ती है।

यदि 36-मंथ नियम लागू होता है और औसत वेतन अधिक निकलता है, तो पेंशन फॉर्मूले के अनुसार अंतिम राशि में वृद्धि स्वाभाविक है।

किन लोगों को होगा सीधा फायदा?

जो कर्मचारी EPS-1995 के सदस्य हैं और जिन्होंने कम से कम 10 वर्ष की सेवा पूरी की है, वे इस बदलाव से लाभान्वित हो सकते हैं। विशेष रूप से वे कर्मचारी जिनका अंतिम वेतन अधिक रहा है, उन्हें 36 महीनों के औसत का लाभ मिल सकता है। वर्तमान में कम पेंशन पाने वाले लाखों पेंशनभोगियों को यदि ₹7,500 न्यूनतम पेंशन मिलती है तो यह उनके लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है।

न्यायिक पहलू और उच्च पेंशन का मुद्दा

पेंशन से जुड़े कई मामलों में समय-समय पर न्यायालय का हस्तक्षेप भी रहा है। Supreme Court of India ने उच्च वेतन के आधार पर पेंशन के विकल्प से संबंधित महत्वपूर्ण निर्णय दिए हैं। इन फैसलों के बाद कई कर्मचारियों ने उच्च पेंशन के लिए आवेदन किया। इससे यह स्पष्ट होता है कि पेंशन ढांचे में बदलाव संभव है, बशर्ते सरकार और संबंधित प्राधिकरण आवश्यक कदम उठाएं।

सरकार पर संभावित प्रभाव

यदि न्यूनतम पेंशन को ₹7,500 तक बढ़ाया जाता है तो इससे वित्तीय बोझ बढ़ सकता है। EPS फंड का संचालन संतुलित तरीके से करना आवश्यक है, ताकि भविष्य में भी पेंशन भुगतान सुचारू रूप से जारी रहे। हालांकि सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सरकार को दीर्घकालिक रणनीति बनानी पड़ सकती है।

कर्मचारियों को क्या ध्यान रखना चाहिए?

कर्मचारियों को अपने UAN को सक्रिय रखना चाहिए और EPFO पोर्टल पर नियमित रूप से अपने खाते की जांच करनी चाहिए। पेंशन से जुड़े सभी दस्तावेज सुरक्षित रखना जरूरी है। किसी भी बदलाव या नई सुविधा की जानकारी केवल आधिकारिक अधिसूचना से ही सुनिश्चित करें। अफवाहों से बचना और प्रमाणित सूचना पर भरोसा करना बेहद जरूरी है।

निष्कर्ष

₹7,500 मासिक पेंशन और 36-मंथ नियम में राहत की मांग ने लाखों पेंशनभोगियों की उम्मीदें बढ़ा दी हैं। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो इससे रिटायर्ड कर्मचारियों को आर्थिक मजबूती मिल सकती है और उनका जीवन स्तर बेहतर हो सकता है। हालांकि अंतिम निर्णय सरकार की आधिकारिक घोषणा पर निर्भर करेगा। तब तक इसे संभावित सुधार के रूप में देखा जा सकता है। फिर भी इतना निश्चित है कि EPFO पेंशन योजना में सुधार की दिशा में कोई भी सकारात्मक कदम देश के लाखों वरिष्ठ नागरिकों के लिए राहत लेकर आ सकता है।

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